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आज मेरा जन्मदिन है

Posted On: 22 Feb, 2013 Others में

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आज मेरा जन्मदिन है

22 फरवरी 1987,रात के करीब 2.45 पे एक औरत,जो मेरी माँ है, उसने मुझे नॊ माह की पीड़ा के बाद अपनी कोख से पैदा किया था। पैदा होने पे मै  बहुत रोया जैसे और बच्चे रोते है, पर मेरी माँ ने मुझे बताया की  तुम और बच्चो  से जादा  रोये थे। ये सुनकर मै  झट से पुछ  बैठा, क्यों? पैदा होने पर मै  या कोई और बच्चा क्यों रोता है? माँ ने इधर उधर से,  भगवान् से जोड़कर उस समय मुझे कुछ  बता दिया।  पर मै  संतुष्ट नहीं था।  उसके बाद जीवन मे   रोने के कई पल   मिले,  कभी पापा से पीटने पर कभी चोट लगने पर, कभी कम नम्बर आने पर, नोकरी न लगने पर ,किसी अपने के चले जाने पर, और न जाने क्या क्या ? यहाँरोने के सभी कारणों का मुझे पता था पर पैदा होने के समय का नहीं। 

मैंने कई धार्मिक, जानकार और विद्वान लोगो से जानना चाहा  की पैदा होने  पर मै  क्यों रोया ?मै  तभी रोता हु, जब व्यक्तिगत तौर पर मुझे कष्ट  हो, पर पैदा होने से जुडी बाते मुझे समझ नहीं आती, सभी ने अपने तर्क से जवाब दिया। किसी ने कहा बालक जब  इस्वर से  अलग होता है तब वो रोता है। कुछ ने कहा की बालक रोकर अपने आने का अहसास देता है, की वो नन्हा बालक है उसकी जिमेदारी अब आपकी है .

ये सारी  बाते सही हो सकती है, पर मै  क्यों रोया इस  बात के  जवाब से मै संतुष्ट  नहीं था…………..

16 दिसम्बर 2012 एक स्त्री के शरीर , दिमाक, जज्बात का चीर हरण हुआ। मै  उस दिन भी बहुत रोया पर  उस दिन मुझे पता चला की मै  पैदा होने पर क्यों रोया था। 

बच्चो  की पहली पाठशाला उसके माता-पिता होते है, मेरे भी थे, उन्होंने मुझे अच्छे  संस्कार  दिये, उसूलो  वाला बनाया, अपने पैरो पर खड़ा होना सिखया, पर अपने ही माता पिता  से जाती,धर्म की भेदभाव के बाते सुनकर मुझे पता चला की मै  पैदा होने पर क्यों रोया था.

विद्यालय ज्ञान  का भण्डार है, और गुरु इस्वर का अवतार, यही पर और ऐसे ही गुरु से मुझे अच्छी अच्छी बाते सिखने को मिली।अच्छे  संस्कारो और कर्तव्यो की सूचि  मुझे पकड़ा दी गयी।  नैतिकता का पूरा प्रवचन याद कराया गया।मुझे बताया गया की हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई  सब है भाई-भाई,पर दंगे, लड़ाई,जिहाद,धर्म-अधर्म,कत्लेआम देखकर मुझे पता चला की  मै  पैदा होने पर क्यों रोया था। 

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अरस्तु ने कहा था। मुझे भी समाज, अडोस-पड़ोस से पता चल गया की ये मेरा घर है, यही मेरा मोहल्ला और यही मेरा समाज है। हमें इसी समाज मे  रहना है,पर जब मैंने असंतुलित समाज, गरीब-आमिर की खाई, भिखारी, भूख से बिलखते लोग, औरतो के शोषण को देखा तो मै  समझ गया की मै  पैदा होने पे क्यों रोया था। 

देश, हमारा राष्ट्र, जहा मै  रहता हु, ये भी मुझे कही न कही से पता चल ही गया की इसे भारत माँ कहते है। ये जननी है हमारी,यहाँ विभिन्नता है एकता भी पर  जब  इसकी इज्जत लुटते, कचोटते, इसकी मर्यादाओ को तार-तार  करते राजनेताओ  को देखा,तो मै   समझ गया की मै   पैदा होने पर  क्यों रोया था। 

क्यों रोया था। 

नैतिकता की ईमारत तो मैंने कई बार बनायी

पर  जाने लोग इसे क्यों तोड़ देते है

वास्तविकता को छोड़

वो अँधेरे मे  क्यों दोड़ते है

एक बालक रोता आता  है

अपने ही नहीं

सभी के जिन्दगी के रहस्यों को समझ जाता है

इसीलिए वो रोता  है,  

इसीलिए वो रोता  है।

 

आज मेरा जन्म दिन है

यतीन्द्र पाण्डेय

 

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shalinikaushik के द्वारा
February 25, 2013

ek vishleshan jo shayad pahli bar dhyan me aaya .bahut bhavpoorn kintu satya ke pas .HAPPY BIRTHDAY TO YATNIDRA JI .

    yatindrapandey के द्वारा
    February 25, 2013

    आपको मेरा लेख पसंद आया इससे बड़ी बात मेरे लिए क्या हो सकती है बहुत बहुत धन्यवाद

rose9310 के द्वारा
February 25, 2013

मैंने तुम्हारे बहुत सारे कृतियों को पढ़ा है किन्तु ये रचना कुछ अलग सी महसूस हुई,कुछ शब्दों में कहना चाहूंगी – ये जीवन रहस्यों से भरा है पर हम कितने रहस्यों को समझते है या महसूस करते है हमें पता नही पर शायद ये वक़्त है की तुम कुछ रहस्यों के परते खोल सको और जान सको.एक शांत रचना जिसने मुझे सोचने पर मजबूर किया क्या वाकई ऐसा है ? ऐसे ही लिखते रहो i m waiting for a new mind opening

    yatindrapandey के द्वारा
    February 25, 2013

    thank you mam

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
February 25, 2013

आदरणीय यतीन्द्र जी, बहुत ही कठिन प्रश्न का उत्तर आपने जिस ढंग से अपनी लेख में उतारा है सच में बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर गया | बहुत-बहुत बधाई |

    yatindrapandey के द्वारा
    February 25, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
February 24, 2013

इस आलेख पर अभी अभी नजर पड़ी! सर्वप्रथम आपको आपके जन्मदिन की बधाई दे दूं! उसके बाद आपके रोने के कर्ण जानकार मेरा मन भी अवसाद से भर गया …. मुझे भी मेरे रोने का कारण पता चल गया! आपका यह आलेख हर ब्यक्ति को सोचने पर मजबूर करता है आखिर हम क्यों रोते हैं…आखिर हम क्यों सोते हैं? क्यों खोते हैं बाद में पछताते एवं रोते हैं!

    jlsingh के द्वारा
    February 24, 2013

    आपके रोने का कारण जानकर मेरा मन भी अवसाद से भर गया ….

    yatindrapandey के द्वारा
    February 25, 2013

    आदरणीय sir बहुत बहुत धन्यवाद


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