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मेरी मौत

Posted On: 4 Aug, 2013 Others में

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मेरी मौत इतनी हीं सस्ती होंगी

आशुओं की चारों तरफ बस्ती होगी,
चिता पर मैं, 
और मेरी हस्तीं होगी,
तस्सवूर में खोजेंगे लोग मुझे,
पर मेरीं मौत इतनी ही,
सस्ती होगी.

याद में मेरे खो जाएगी वो,
दर्दो में इतना डूब जाएगी वो,
आँखों मे हमेशा नमीं ही रहेगी,
पर मेरी मौत इतनी ही,
सस्ती होगी.

ताल्लुकात सबसे टूट जायेंगे,
अँधेरे के दामन मे हम सों जायेंगे,
खून फेंकते फेफड़ो को,
हर जमीं नमन करेगी,
पर मेरी मौत इतनी ही,
सस्ती होगी,
इतनी ही,
सस्ती होगी.

 यतीन्द्र पाण्डेय

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaishree Verma के द्वारा
August 9, 2013

सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति यतीन्द्र पाण्डेय जी !

    yatindrapandey के द्वारा
    August 10, 2013

    धन्यवाद जयश्री जी

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 5, 2013

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें. आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    yatindrapandey के द्वारा
    August 8, 2013

    आपने मेरी कविता के लिए समय निकला इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद मै जादा पोस्ट डाल कर जागरण जंक्शन को परेसान नहीं करना चाहता मुझे पढने का भी आनंद लेना जो है.

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
August 4, 2013

मौत कभी भी सस्ती नहीं होती / जीवन से घबड़ाने नहीं संघर्ष करने की आदत डालना चाहिए / युवा लग रहे है आप और अभी से मौत की बात / बुरा नहीं मानियेगा / बस यु ही लिख डाला /

    yatindrapandey के द्वारा
    August 8, 2013

    हैलो राजेश जी आप ने सही पहचाना मई युवा ही हू पर भटका हुआ या आशिकी मे फशा हुआ नहीं मौत सिर्फ मेरे लिए या आप के लिए नहीं है ये तो एक सत्य है. आपका विश्लेष्ण इस कविता के लिए थोडा कम हो गया आप चाहते तो इसे देश के किसी सैनिक के ऊपर रख कर भी पढ़ सकते थे. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

harirawat के द्वारा
August 4, 2013

यतीन्द्र जी आपकी कविता की गहराई से मनन करने की आवश्यकता है ! वैसे नहीं कह सकता जब आप कविता लिख रहे होंगे कौन सी भाव तरंगे आपके दिल और दिमाग में उछल कूद मचा रही होगी, लेकिन सस्ती मौत की ब्याखा को छोड़ दें तो कविता रोमांटिक है ! बधाई !

    yatindrapandey के द्वारा
    August 8, 2013

    हैलो सर सभी ने इस कविता का अलग अलग विश्लेष्ण किया है आप ने रोमांटिक कहा मुझे खुसी हुई अपना मार्गदर्शन बनाये रहे आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
August 4, 2013

यतीन्द्र जी, इतनी भी सस्ती न बनाइये अपनी जिन्दगी या मौत को … जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है … :)

    yatindrapandey के द्वारा
    August 8, 2013

    सुन कर अच्छा लगा की मेरी मौत से किसी को तो फर्क पड़ता है वैसे सर इस कविता का विषलेषण हर किसी ने अपने तरीके से ही किया है पर मै आपको बताना चाहूँगा की आप इसे किसी भी रूप मे देख सकते है बस मेरे लिए न देखिये आप के प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद


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