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विकलांग

Posted On: 9 Aug, 2013 Others में

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विकलांग

वो अपने पैरो से चल नहीं पाता,
वो दौड़ नहीं सकता,
वो अधीर है,
क्योकि,
वो विकलांग है,
लोग उसे दया की दृष्टी से,
तो कभी घिन्न से देखते है,
वो शारीरिक बनावट मे,
हमारे जैसा नहीं,
आखिर मै कितनी देर उसे देख पाता,
समझ पाता,
पर मेरा जेहन
मुझसे प्रश्न पूछता है?
क्या शारीरिक बनावट ही,
शोभनियता की प्रतीक है?
क्या ये मांस का ढ़ाचा ही सब कुछ है?
मेरी और सभी की पहचान,
क्या इसी ढाचे से है?
मै तो बस हंस कर रह जाता हूँ,
खुद पर,
ये सोचकर,
की शारीरिक विकलांगता तो,
एक पहलू मात्र है,
हम तो मानसिक विकलांग है.
हाँ,
सही सुना
मानसिक विकलांग.

यतीन्द्र पाण्डेय  

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
August 15, 2013

बिलकुल सत्य मानसिक विकलांगता ही वर्त्तमान सामाजिक विकृति का कारण है.इंसान मन से ही कमज़ोर और सशक्त बनता है हमेशा खुश रहो साभार

    yatindrapandey के द्वारा
    August 18, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद अपना सहयोग बनाये रखे

deepakbijnory के द्वारा
August 15, 2013

SHAYAD MANSIK विकलांगता JYADA बरी बीमारी HAI

    yatindrapandey के द्वारा
    August 15, 2013

    धन्यवाद सर जी

yogi sarswat के द्वारा
August 13, 2013

पर मेरा जेहन मुझसे प्रश्न पूछता है? क्या शारीरिक बनावट ही, शोभनियता की प्रतीक है? क्या ये मांस का ढ़ाचा ही सब कुछ है? मेरी और सभी की पहचान, क्या इसी ढाचे से है? मै तो बस हंस कर रह जाता हूँ, बहुत सुन्दर , भावनात्मक शब्द श्री पाण्डेय जी !

    yatindrapandey के द्वारा
    August 13, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद sir

yatindrapandey के द्वारा
August 10, 2013

बहुत बहुत धन्यवाद

harirawat के द्वारा
August 9, 2013

पांडे जी अभी तो आप जवानी में कदम रख रहे हैं, ये मेरा चस्मा बता रहा है, और आपकी सोच, आपके भाव, आपके अन्दर का सजीव मानव बहुत ज्ञानी और बहुत ही सुलझा हुआ, जिन्दगी के कही बसंत और पतझड़ से मुलाक़ात कर चुका है ! आपका सन्देश की “आज आदमी केवल और केवल मानसिक विकलांग है” ! बिलकुल सही है ! भावात्मक रचना के लिए साधुवाद ! हरेन्द्र जागते रहो !

    jlsingh के द्वारा
    August 9, 2013

    आदरणीय रावत साहब, सादर अभिवादन! यतीन्द्र जी की पोस्ट ‘हमारी याददाश्त’ मेरी नजर में आंख खोलने वाली है. मैं कई जगह इस पोस्ट का उदाहरण दे चूका हूँ! इनकी सोच बहुत ही अच्छी है और मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ इनकी बुद्धि और कलम की शक्ति में नयी उर्जा का संचार करते रहें!….. पाण्डेय जी को शुभकामनायें !

    yatindrapandey के द्वारा
    August 10, 2013

    हैलो सर जब मै पैदा हुआ तो कुछ सवालो के साथ पैदा हुआ वक्त के साथ सवाल बढ़ते गए और जिज्ञासा भी बहुत सवालो के जवाब मैंने खुद ही ढूंढे और कुछ अभी तक नहीं मिले ये सारी रचनाये मेरे सवालो के सम्कछ है आप लोगो से मैंने बहुत कुछ सीखा है मै लिखता तो हु पर पढने का भी पूर्ण आनंद लेता हु बस उन्ही सब उन्माद से ये रचनाये बन जाती है. आप सभी का सहयोग रहा तो जो मंशा मैंने बनायीं है उसको जरुर प् लूँगा. जे ल सर, आप ने मेरी लेखनी का समय समय पर प्रोत्साहन किया इसके लिए मै आपका बहुत आभारी हु अपना सहयोग बनाये रखे धन्यवाद यतीन्द्र


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