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दो सौ में अंतिम संस्कार (कांटेस्ट)

Posted On: 28 Jan, 2014 Others में

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दो सौ में अंतिम संस्कार

 

कल रात मैं चैन से सो नहीं पाया|पड़ोस के घर से आ रही रोने की आवाज मुझे विचलित कर रही थी| ये तो समझ गया था की कोई मट्टी हो गया है.. पर कौन? मुझे नहीं पता? गलियों में गाड़ीयों का शोर भी बढ़ रहा था, पर फिर भी वो चीत्कार मुझे बेचैन कर रही थी| अत्यधिक विचलित होने पर मैं कमरे में ही टहलने लगा|खिड़की से बाहर आती जाती गाड़ीयों को देखने लगा|ओह्!ये रोना, चीखना,चिल्लाना,मेरे तन-बदन को जला रहा था|करीब रात के २ बज रहे थे,आँखों में आ रही नींद को मैं रोक न सका और तकिये से मुह दबां कर सो गया| अभी मेरी आंख लगी ही थी की अचानक एक कुत्ते की चिल्लाने की आवाज से मैं फिर से उठ पड़ा,बाहर देखा कोई कुत्ता गाड़ी के नीचे आ गया था और सभी कुत्ते गाड़ी वाले पर भौक रहे थे| पर अब मुझे सोना था कैसे भी? उन चिल्लाहट को दरकिनार कर मैं गहरी नींद के आगोश में चला गया|

प्रातः ७ बजे मेरी नींद फिर इसी तरह के शोर से खुली|मैं उठ कर बाहर निकला तो देखा मेरे ही दरवाजे पे एक कुत्ते का पिल्ला मरा पड़ा है|वो वही था,जो रात में गाड़ी के नीचे आ गया था|मैं अफसोस से उसकी तरफ देखा और नजर घुमाई तो चार घर छोड़ कर एक वृद्ध व्यक्ति मट्टी हो गया था, उनका पार्थिव शरीर सजा हुआ था| मै उन्हें जानता तो नहीं था पर कभी-कभी गली के कुत्तों को दूध पिलाते देखा था|तभी हमारे मकान मालिक आ गए और सामने वृद्ध व्यक्ति की मिट्टी को प्रणाम किया, और बोले… “अच्छे आदमी थे”| तभी उनकी नज़र मरे हुए कुत्ते के पिल्ले पर पड़ी और ये देखकर वो भड़क पड़े|अरे यार..“इसे यही मरना था”…और सामने से आ रहे कूड़े वाले को उसे उठाने को कहा…कूड़े वाले ने भी तन कर ५०० रूपए की मांग कर दी|थोड़ी झक-झक के बाद बात २०० रूपए में तय हो गयी| मकान मालिक ने २०० रूपए दिए और कूड़े वाले ने कुत्ते को उठा लिया|

उस बूढ़े व्यक्ति की अर्थी मेरे सामने से गुजरी मैंने उसे प्रणाम किया और वहीँ से उस कुत्ते की भी मट्टी गयी मैंने उसे भी ……

मौत एक होती है,

पर व्यवहार एक नहीं,

आत्मा एक होती है,

पर अंतिम संस्कार एक नहीं|

 

यतीन्द्र पाण्डेय

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
January 31, 2014

KITNI SARALTA AUR SAHAJTA SE SAB KUCHH KAH DIYA YATINDRA JI BAHOOT KHOOB

    yatindrapandey के द्वारा
    February 1, 2014

    हैलो दीपक सर आपके उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अपना सहयोग और आशीर्वाद बनाये रखे

alkargupta1 के द्वारा
January 31, 2014

मौत एक होती है, पर व्यवहार एक नहीं, आत्मा एक होती है, पर अंतिम संस्कार एक नहीं| बहुत अच्छी लघुकथा… शाश्वत सत्य आत्मा तो एक ही होती है चाहे कोई भी प्राणी हो ….

    yatindrapandey के द्वारा
    February 1, 2014

    बहुत शुक्रिया अलका जी मेरा उत्साह बढ़ने के लिए धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
January 31, 2014

भावनाओं का हिलोल मारती सार्थक रचना श्री यतीन्द्र जी !

    yatindrapandey के द्वारा
    February 1, 2014

    योगी जी आपका बहुत धन्यवाद आप मेरी रचनाये पढ़ते है यहीं भहुत है सहयोग बनाये रखे

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 30, 2014

बिलकुल सत्य ! पाण्डेय जी बधाई !!

    yatindrapandey के द्वारा
    February 1, 2014

    धन्यवाद सर सहयोग बनाये रखे

jlsingh के द्वारा
January 30, 2014

एक लाइन कहूंगा – पुरानी है – बहुत पुरानी – मरनो भलो विदेश में जहाँ न अपना कोय, माटी खाये जानवर महा महोत्सव होय!

    yatindrapandey के द्वारा
    January 30, 2014

    जवाहर सर आपकी सब बात सर आँखों पर आपना आशीर्वाद बनाये रखे

sadguruji के द्वारा
January 29, 2014

मौत एक होती है, पर व्यवहार एक नहीं, आत्मा एक होती है, पर अंतिम संस्कार एक नहीं|बहुत नवीनता लिए प्रेरक लघुकथा.आपको बधाई और कांटेस्ट के लिए शुभकामनायें.

    yatindrapandey के द्वारा
    January 30, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद सर अपना सहयोग बनाये रखे

January 28, 2014

ये हमारे पूर्व जन्म के कर्म हैं बस और कुछ नहीं .

    yatindrapandey के द्वारा
    January 30, 2014

    पूर्व जन्म का तो किसी को पता नहीं होता पर इस जन्म मे तो कुत्ते मानव से जादा अच्छे और समझदार है


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