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आज मुर्दा हो गया

Posted On: 4 Jan, 2017 Others,social issues,कविता में

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मेरी रूह का शहर
आज मुर्दा हो गया,
जिसे सुकून की नमाज़ माना ,
वो ऊदु बन गया ,
एक पाकीज़ा दिल का धड़कना,
आज बंद सा हो गया,
दो जिस्मों का एक साया,
आज बिखर कर टूट गया ,
जलाकर तसल्ली खुदकी,
अब मैं रहनुमा बन गया ,
मेरी रूह का शहर ,
आज मुर्दा हो गया ।

यतींद्र

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Shobha के द्वारा
January 8, 2017

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