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मेरा वजूद

Posted On 12 Jan, 2017 में

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कुछ क़दम मेरे साथ चल कर तो देखतें,
मेरे जज़्बातों की बारीकियों को,
समझ कर तो देखते,
हो सकता है,
हो सकता है,
कुछ तस्वीरों में,
मेरे चेहरे बेमानी लगते हों,
पर कभी कोई तस्वीर मेरे दिल की,
निकाल कर तो देखते,
कुछ क़दम मेरे साथ चल कर तो देखतें ।
बस यूँही कुछ बदल सा गया अब मुझमें,
बस यूँही कुछ संकुचित सा हो गया अब मुझमें,
बस यूँही सपनों का टूट जाना,
बस यूँही मेरा ज़ेहन का बिखर जाना,
मेरी तुझसे जुड़ी प्रार्थनाओं को ,
एक पल महसूस करके तो देखते,
कुछ क़दम मेरे साथ चल कर तो देखतें,
तुम्हें शीघ्रता थी,
मौला से ताल्लुकात बढ़ाने की,
एक हसीन लम्हो को छोड़ जाने की,
मेरे हर वीरान रातों की,
हर अकेलेपन की ज़िम्मेदार तुम हो,
मेरे ज़िन्दादिली की मौत,
मेरे अश्क़ों के गुनहगार तुम हो,
मेरे मोहब्बत की इमारत में रह कर तो देखतें,
कुछ क़दम मेरे साथ चल कर तो देखतें ।

अब तू नहीं…
तो मेरा वजूद नहीं…
अब तू परमात्मा में है…
और मैं तेरी आत्मा में!!!

यतींद्र

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 14, 2017

प्रिय यतीन्द्र जी खूबसूरती से आपने अपने मन के भावों को अपनी लेखनी में उतारा है अब तू नहीं… तो मेरा वजूद नहीं… अब तू परमात्मा में है… और मैं तेरी आत्मा में!!!


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