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एक और पाकिस्तान निकलेगा

Posted On: 11 Mar, 2017 में

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एक और पाकिस्तान निकलेगा

नफ़रत का एक और तज़िया निकलेगा,

जगह-जगह आग और दंगों का गहना सजेगा,

स्त्री अभी भी लूटी है, तब भी लुटेंगीं,

इंसानियत अभी भी मरी है, तब भी मरेगी,

सच्चाई से तब सबका सामना होगा,

इसी देश से,

जब एक और पाकिस्तान निकलेगा |

पकिस्तान क्या है ? एक देश होने से पहले, एक अलगाव का, एक क्रोध, असमानता, द्वेष, बटवारे, और शायद एक बहुत बड़ी राजनीति का ही प्रतीक है| जो वर्षो पहले हुआ था उसका परिणाम है “पकिस्तान”, और ये बात कहने में मुझे तनिक भी हिचक नहीं की अब इस देश के हालात वैसे ही है जैसे उस दर्मिया रहे होंगे| अगर इस बात को मैं एक तरफ कर भी दूँ तो देश मे फैली, एक सोच तो अलगाव को ही बढ़ावा दे रही है, जो चाहती है की इस देश से एक और पाकिस्तान निकले | ये सर्वथा सत्य है की हम गुस्से मे है, होना जायज भी है, पर किस पर अपनों पर ही, इतने असंतुलित होकर क्यों ?

क्यों बढ़ती जा रही है ये संकीर्ण मानसिकता ? सोशल मीडिया पर छुपे कुछ गुप्तचर देश को बर्बादी की तरफ मोड़ रहे है, और कही न कही हम उस पथ में उनका सहयोग कर रहे है| कितना आसान हो गया है इस देश में एक साम्प्रदायिक सन्देश को प्रेषित करना| बहुत से लोगों को, हो सकता है, ये एक मज़ाक लगता हो, पर आप ये समझ नहीं पा रहे की आप देश मे एक नए तरह के गुस्से और द्वेष को जन्म दे रहे है| जिसका परिणाम वही होगा जो बहुत पहले हुआ था|

आपको कैसा लगेगा? अगर आपके घर वालों को आपके सामने जला दिया जाये, आपको कैसा लगेगा? अगर आपके घर की स्त्रियों के साथ बलात्कार हो, और आप चाह कर के भी कुछ न कर पाए| ये सब हो चूका है, मैं कुछ नया नहीं लिख रहा, और अगर ये दुबारा हुआ, तो उसकी वजह हम और आप ही होंगे, क्योंकि आज हमने नफ़रत और जलन का बीज बोना शुरू कर दिया है इसका परिणाम भी आएगा|

जिस देश को एकता का प्रतीक कहते है, दरअसल वो है ही नहीं| ये हमारे देश में सिर्फ एक कहावत मात्र बनके रहे गयी है| इस देश का इतिहास गवाह है की हम हमेशा आपस मे लड़ कर मरे है, और दुसरो को, खुद पर अधिपत्य ज़माने दिया है, और आज भी कर रहे है बस आज हमारे तरीके अलग हो गए है हम सोशल मीडिया को अपना प्लेटफार्म बना रहे है| कहने को हम न जाने कितने धर्मो,जातियों,समुदायों में बटे है, पर कोई किसी की सुनता ही नहीं, सब खुद को बड़ा बताने में लगे है, तो एकता कहा से आयेगी| आपका एक छोटा सा सन्देश जो धर्म विरोधी, जात या समाज विरोधी हो सिर्फ नफरतों को बढ़ा रहा है |

आशुओ की बस्तिया बनेंगी,

रात भी धु धु कर जलेगी,

दफ़नाने को भी जगह कम पड़ेगी,

शरीर पर तब

एक भी लिबाश न होगा,

इसी देश से,

जब एक और पाकिस्तान निकलेगा |

ये देश दो भागों में बट गया है,

· मोदी पछिय और

· मोदी विरोधी

इन दोनों श्रेणियों में आने वाले लोग कुछ विशेष प्रवृत्ति और विशेषताए रखते है जो कुछ हद तक ऐसी है :

मोदी पछिय:

· इस श्रेणी के लोग पूरी तरह से अपने स्वामी के समर्थक होते है |

· ये अपने स्वामी के बारे मे एक भी बुरी बात सुन नहीं सकते|

· दरअसल ये लोग उनपर अँधा विश्वास करते है|

· उनके उठाये कदमो से क्या फर्क पड़ेगा क्या नहीं ये इन्हें पता हो चाहे न हो पर ये उनके हर बात का समर्थन करते है|

· चाहे घर मे खुद ही को महंगाई की मार क्यों न झेलनी पड़े ये पूर्ण रूप से स्वामी भक्त होते है|

· इनमे से बहुत से ऐसे लोग है जो सिर्फ धार्मिक बातों के मापदण्ड पर ही इनका समर्थन करते है, क्योंकि ऐसे लोगो के पास कोई काम नहीं और उनके पास देश मे और कोई मुद्दा भी नहीं|

· कुछ लोग विकास को अपना हथियार बनाते है जो अभी तक देश को दिखा नहीं|

· ऐसे लोगो की सबसे खास बात ये होती है की ये बहुत ज्यादा तुलनात्मक होते है अगर तर्क में आपने इनकी पार्टी या मोदी जी को गलत साबित कर दिया तो ये तुरंत अपना तुलनात्मक रूप दिखाते है और कहते है की पिछली सरकार ने इतने सालो में क्या किया था |

ऐसे लोगो से मेरा प्रश्न बस इतना सा है की अगर किसी के पिता चार क़त्ल करते है तो क्या उसके बेटे को ये अधिकार मिल जाता की वो भी न्यूनतम ४ क़त्ल तो कर ही सकता है और अगर एक किया तो कोई बात नहीं | क्युकी इस श्रेणी के लोग ज्यादा तर यहीं तर्क देते है उनकी सरकार में ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ मोदी जी में कम| अंधभक्ति इतनी भी सही नहीं है जहाँ गलत हो वहां गलत बताये वो भी पूरी बात का विशलेषण व्यक्तिगत तौर पर करने के बाद और जहा सही हो वहा सराहना दे |

माफ़ कीजियेगा ऊपर की ये बातें पढ़कर आपको लग रहा होगा की मैं मोदी विरोधी हूँ पर ऐसा नहीं :

मोदी विरोधी

· ये लोग बहुत व्याकुल होते है, दुनिया के किसी भी कोने में कुछ भी बुरा हो ये लोग उसे मोदी जी से जोड़ कर देखते है|

· अगर किसी गांव मे कोई मर गया तो मोदी जी जिम्मेदार है|

· ऐसे लोगो को लगता है देश को सिर्फ एक प्रधनमंत्री चला रहा है और सारे मंत्री लोग घास छिल रहे है | देश मे कोई प्रबंधन है ही नहीं उच्च, माध्यम, निम्न, सजिवालय, संसद सब अकेले मोदी जी देख रहे है|

· इनका अपना कोई औचित्य ही नहीं क्युकी सामने एक ऐसा प्रधानमंत्री था जो कभी बोला ही नहीं अब उसकी तरफदारी या फिर सहजादे की तरफदारी कैसे करे ?

ऐसे लोगो से बस इतना ही कहना है की आप लोगो को विरोध करना अच्छा लगता होगा पर उसकी बुनियाद तो सही बनाओ किसी के अछें काम में भी नुक्स निकलना जायज नहीं लगता|

पर सत्य तो ये है की ऐसे दोनों ही प्रवित्ति के लोगो मे एक समानता है की ये भारत के नागरिक है, ये दोनों द्वेष से ग्रषित है, और मारने काटने को भी तैयार है| ये लोग देश को विखण्डित करने मे अग्रसर है| ये लोग अपने देश को दिमक की तरह खाते जा रहे है, इससे देश उन्नत नहीं कर सकता सिर्फ गर्त में जायेगा|

एक लेखक और stand up commidian वरुण ग्रोवर जी की बात याद है मुझे उन्होंने कहा था की गंदगी करना तो हमारा इतिहास रहा है और ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मोदी जी हम लोगो से सफाई करने को कह रहे है, ये कैसे मुमकिन है | वैसे तो ये एक व्यंग्य ही है पर सोचने वाली बात ये है की अपने देश की प्रगति में आपका और हमारा क्या योगदान है| देश के बारे सोशल मीडिया पर बड़ी बड़ी बातें लिखना देश को बढ़ाना नहीं है| ये सिर्फ अपनी भड़ास निकलना मात्र है | कभी कभी मुझे ऐसा लगता है ये वो लोग है जो अपने घर परिवार में कभी बोल नहीं पाए तो आज पीछे चुप कर किसी को भी कुछ भी बोल देते है| रोज रोज देश को एक नयी बात भी मिल ही जा रही है और हमारे लोगो को मुद्दा |

देश के आज कल के यूथ को हिंदी वर्ण माला याद नहीं, संज्ञा क्या है, अलंकार क्या है, याद नहीं ये स्थिति है इस देश के नौजवान की, नहीं विश्वास हो तो आस पास पूछ लीजिये या फिर youtube पर तमाम सर्वे रिपोर्ट है देख लीजिये| यहाँ किसी को निचा या किसे के ज्ञान का आकलन करना नहीं बस इतना कहना है की जो लोग देश को गलत तरफ मोड़ने का प्रयाश कर रहे है, वो पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखे की उनकी इतनी हैसियत है क्या की वो देश के प्रधानमंत्री या राज्य के मुख्यमंत्री या देश के किसी भी नेता अभिनेता के बारे में कुछ भी कहने की, और आपका क्या योगदान है इस देश को उन्नत बनाने में|

डेल्ही से बरेली के सफ़र में एक गाव में कुछ समय रुकना हुआ| वहां एक बहुत बुजुर्ग व्यक्ति जिनकी उम्र तक़रीबन ७० वर्ष होगी से मुलाकात हुई| कुछ बातें उनकी दिल को छु गयी, मेरे प्रश्न कई थे, पर सिर्फ उनके जवाब को यहाँ लिख रहा हूँ |

बेटा यहाँ गाव में सालो में सिर्फ कुछ खम्बे लगे है, और कुछ मोटी मोटी तारे| बस यहाँ कोई और बदलाव नहीं हुआ, मैं इस गाव में शुरू से हूँ, बच्चे सब गाव छोड़ कर बहार पढने या नौकरी करने चले गए| अब यहाँ ज्यादा तर बुजुर्ग लोग ही मिलेंगे| वैसे अच्छा है बेटा इस गाव में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ क्युकी ४ खम्बे लगने से व्यवहार बदलने लगे थे, अगर गाव को शहर बनाने लगे तो यहाँ की एकता का क्या होगा| वाकई हिन्दुस्तान की एकता गावों में ही बसती है | अभी तक़रीबन २० दिन पहले मेरे पड़ोसी नासिर साहब का निधन हो गया उनके बच्चे यहाँ नहीं थे, मैं ही गया उनकी मिटटी लेकर, अगर ये गाव बदल जाता, विकसित हो जाता तो सायद नासिर साहब की मिट्टी मैं नहीं ले जा पाता| बेटा मुझे लगता है मेरा देश उस नर्सरी कक्षा की तरह हो गया है जिसमे बच्चों को तमाम छोटी-छोटी दिक्कतें होती है और वो अपनी हर बात अपने अध्यापक को कहते रहते है, जैसे मैडम इसने मुझे गाली दी, इसने मुझे चिकोटी काटी, इसने मुझे मारा, इसने मेरी पेन्सिल ले ली, इसने मेरी किताब फाड़ दी, इसने मुझे चोर कहा, इसने मुझ पर थूका, और अंत में मैडम में शुशु करने जाऊ|

बेटा गरीब १९४७ में भी गरीब था २०१७ में भी गरीब है, हिन्दू हो या मुस्लिम गरीब तो गरीब है| कम से कम अपना गाव तुम्हारे शहर के कोलहल से दूर तो है| गाव को गाव ही रहने दो शहर मत बनाओ क्युकी तुम सबको भी आना एक दिन यहीं है क्युकी वो कहते है जैसे उड़ी जहाज को पंछी,पुनि जहाज पर आवे|

उन्होंने कहा :

टुकड़े-टुकड़े करता है न तू साहिब

पर कसूर तेरा नहीं

इंसानी नस्ल ही

द्वेष के बारूद पर बनी है |

ये बात सुनकर मैं सिर्फ मुस्कुरा ही सकता था क्युकी ये सत्य ही है |

एक रोटी यहाँ भी कच्ची सिकेगी,

एक रोटी वहा भी कच्ची होगी,

शमशान भी मातम में होंगे,

और कब्रिस्तान में भी ख़ुशी नहीं मनाएंगे,

तब नन्हे हाथो में भी भीख का कटोरा होगा,

इसी देश से,

जब एक और पाकिस्तान निकलेगा |

हो सकता है मेरी लेखनी बहुतो को पसंद न आये, ये संभव है, मेरी सोच उन्हें अच्छी न लगे पर सत्य हम और आप कब तक खुद से छुपाते रहेंगे| व्यक्तिगत तौर पर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्या हो रहा है इस बात से| हमारे बनारस में बड़ी बड़ी राजनीती पान के दुकानों पर बना दी जाती है और आज सोशल मीडिया ये सारा काम कर रहा है अगर मैं सोशल मीडिया को डिजिटल पान की दुकान कहू तो कोई अतिसियोक्ति नहीं होगी क्युकी अब देश की राजनीती तो यही तैयार की जा रही है और देश को भर्मित भी किया जा रहा है| अंत में हमेशा की तरह बस इतना कहूँगा की थोडा ठहरिये, समझिये, धैर्य रखिये, कुछ अच्छा नहीं कर सकते तो बुरा भी मत करिए|

ॐ शांति का जाप करिए ||

देश की राजनीती धरासायी होंगी,

रेल की पटरिया लाल होंगी,

बोगियों में बस लाशे होंगी

एक ट्रेन एक नए देश को जा रही होगी,

कुछ बौखलाए लोग खुद के परिजन खोज रहे होंगे,

नंगी तलवारे,

क़त्लेआम,

नरसंहार होगा,

जब इस देश से

एक और पाकिस्तान निकलेगा ||

यतीन्द्र




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