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सुनो देखो बस झूँठ मत कहना

Posted On 23 Jun, 2017 में

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सुनो,
बस झूँठ ना कहना…
बता दो,
आज भी खड़े होकर मुँडेर पर,
याद करते हो ना मुझे….
मेरे आ जाने की ताक में रहते हो ना।
बता दो,
आज भी उस पुराने बंद नम्बर पर कॉल
करते हो ना,
आज भी मेरी वो शर्ट,
जो तुम्हारे पास रह गयी थी…
उसे बाँहों में समेट कर सोते हो ना।

बता दो,
सुनो बस झूठ ना कहना।

बता दो
की मेरी पसंदीता नग़मे सुनकर..
तुम आज भी रो पड़ती हो,
मेरा ज़िक्र आ जाने पर,
किसी की ज़ुबा पर,
तुम सहम जाती हो।
बता दो,
मेरी फ़िक्र तुम्हें आज भी रातों को,
सोने नहीं देती।
मैं अब कैसा दिखता हूँ,
ये चोरी चोरी जानने की कोशिश करती हों।
बता दो,
की तुम्हें आज भी मुझसे उतनी ही मोहब्बत है,
पर व्यर्थ की समजिकता ने,
तुम्हें बांधा हुआ है ।
और तुम्हारे अहसास को बेरंग कर दिया है।

बता दो,
सुनो बस झूठ मत कहना।

बता दो
की नीले नीले आकाश में तुम मेरी तस्वीर ढूँढती हो,
बरबस ही मेरी याद आने पर हंस देती हो,
और घर वालों के पूछने पर कहती हो…
कुछ नहीं बस ऐसे ही।
तुम बता क्यूँ नहीं देती ?
की मैं तुम्हारे रग-रग में बह रहा हूँ।
तुम्हारे अश्क बनकर ना जाने कितनी बार
नीचे गिरा हूँ,
जिसे तुम रुमाल में सम्हाल कर हर बार चूम लेती हो।
बता दो
की तुमने मेरी सारी लिखी ग़ज़ले कंठस्थ कर ली है,
और तुम उसे मुझे सुनना चाहतें हो,
बता दो
की तुमने मेरी दी हुई,
अँगूठी आज भी हाथो में पहनी है,
और तुम उसे अपने अंग का हिस्सा मानने लगी हों।
बता दो
की तुम आज भी वैसे ही सजती हो,
जैसे मैं तुम्हें देखना चाहता था।
बता दो
की रातों में बेचैन होकर जब तुम उठ जाती हो,
तो मुझे अपने आस पास ढूँढती हों,
और चाहती हो की मैं आकर,
तुम्हारे माथे को चूम लूँ,
और तुम्हें अपनी बाहों में सूला लूँ।
बता दो की मेरी उँगलियों से,
तुम्हारे हाथो पर बनाए,
प्यार के इज़हार को तुम याद करती हो।
और घंटो अपने हथेलियों पर
ख़ुद की ही उँगलियाँ से मेरा नाम लिखती हों।

बता दो
सुनो बस झूठ ना कहना

मोहब्बतें इश्क़ की आग तुमने ही लगायी
और तुमने ही बुझायी मेरी,
मोहब्बतें इश्क़ की आग तुमने ही लगायी
और तुमने ही बुझायी मेरी।
पर झुलसतीं तुम रह गयी ।
झुलसतीं तुम रह गयी ।

बता दो
देखो बस झूँठ ना कहना।

यतींद्र

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