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एक सन्देश का प्रवाह (Velocity of a  Message)

Posted On: 29 Dec, 2017 में

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एक सन्देश का प्रवाह (Velocity of a  Message )

महाभारत का एक तथ्य जो शायद बहुत ही कम लोग जानते हो और जो लोग आज  जानेंगे वो आश्चर्य करेंगे। महाभारत में एक चरित्र था कर्कभुज इस चरित्र का विवरण  सिर्फ़ ऋग्वेद  उपनिषद में कुछ एकाध जगह हुआ है शायद वो भी अनजाने में क्यूँकि इस चरित्र को भगवान श्री कृष्ण ने ख़ुद ही छिपा कर रखा था|

कर्कभुज एक ग़रीब किसान था जो पाँचाल राज्य के एक छोटे से क़स्बे में   रहता था, और बेहद ग़रीब था परंतु भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था| उसकी भक्ति इतनी पवित्र थी कि वो कभी भी अपने दर्द के लिए किसी को दोषी नहीं बनाता था और नित्य अपने कर्म में और विष्णु की भक्ति में रत था ।

उसकी इसी भक्ति और कठोर कर्तव्यपरायणता को देखकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और कहा की तुम्हें महाभारत के युद्ध के समाप्ति पर एक अति महत्वपूर्ण काम को अंजाम देना है और उसे पूरी निष्ठा से निभाना है ।

इधर महाभारत के युद्ध में दुर्योधन मारा गया था और अश्वत्थामा अत्यधिक क्रोध में आधी रात्रि में पांडव के शिविर में घुस कर पाँचों पांडव समझकर उनके पाँचों पुत्रों का वध कर दिया था ।

परंतु ये पूरी सचाई नहीं थी श्री कृष्ण भगवान थे, उन्हें सब ज्ञात था इसलिए उन्होंने यहाँ कर्कभुज का प्रयोग किया अश्वत्थामा के आने से पहले ही कर्कभुज शिविर पहुँच गये और श्री कृष्ण के वक्तव्य के अनुसार अर्जुन के पुत्र श्रुतकर्मा को वहाँ से उठा कर ले गये, और वहाँ अपने पुत्र को सुला दिया इस प्रकार उस रक्तपात में पांडव के एक रक्त बचे रह गए।

वैसे उत्तरा के पुत्र परीछित भी पांडव का ही अंश थे|दुनिया से छुपाकर कर्कभुज ने श्रुतकर्मा की देखभाल की जिससे पृथ्वी पर पांडव के वंशज हमेशा रहे।

शायद उनके वंशज आज भी है ।

आप में से अगर कोई अर्थशास्त्र पढ़ होगा तो मुद्रा के वेग यानी velocity of money terminology को समझता होगा जो नहीं समझता मैं उन्हें सरल शब्दों में बताता हूँ|

जब एक मुद्रा यानी करेन्सी एक ही नियत समय में कई हाथो से होकर गुज़रती है तो उससे उस मुद्रा के वेग का आकलन लगाया जाता है जैसे यदि १० रुपय का नोट एक दिन में १० लोग के हाथो से गुज़रा और उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया तो १० के नोट की छमता १०० मानी जाएगी। मैं ज़्यादा अंदर नहीं जाऊँगा मतलब उसके मुद्रा के चलन आकलन करना मात्र।

कुछ ऐसा ही एक नया शब्द है velocity of a message ( एक संदेश का वेग या प्रवाह )

यानी एक ऐसा संदेश जो मैंने बनाया और किसी को भेजा और उसने किसी और को फिर उसने किसी को ये जाने बिना की वो सच था या झुट और धीरे धीरे एक नियत समय में वो बहुतों के पास ना केवल पहुँचा बल्कि उनकी मानसिकता के साथ खेल भी गया।

ऐसा नहीं है की सिर्फ नकारत्मक संप्रेषण ही हो रहा है सकरात्मक भी है परन्तु जैसे आप किसी को बिना किसी काम के कोई पैसा नहीं देते मुझे लगता है उसी तरह एक सन्देश को भी उसकी सत्यता के आधार पर ही संप्रेषित करना चाहिए | ये एक जिम्मेदारी का काम भी है| देश के नागरिको का हर काम कोई और आकर नहीं करेगा कुछ काम हमें भी करने होंगे  |

कुछ लोग है जो इस तरह के सन्देश बनाते है और हम इसे  बिना जाचें  भेजते रहते है आप इस बात को इस तरह भी देख सकते है की भारत में एक सन्देश को फ़ैलाने में कितना समय  लगेगा इसी को सन्देश का  प्रवाह कह सकते है यानि (velocity of a message)|

कुछ पुराने उदहारण है जैसे

प्याज का दाम बढ़ जाना

नमक बाजार में नहीं है

२००० के नोट बंद हो रहे है

१० रूपए के सिक्के नकली है

२५० रूपए के नोट की पिक्चर

कुछ इतिहास के तथ्यों से खिलवाड़ वाले सन्देश

कुछ धर्म और शास्त्रों का गलत व्याख्या वाले सन्देश

भगवान् के नाम पर सन्देश

और ऐसे न जाने कितने नकरात्मक सन्देश रोज हमारे बिच संप्रेषित किये जा रहे है मुझे ये जानकार आश्चर्य बिलकुल नहीं हुआ जब ऊपर लिखी मेरे द्वारा झूटी कहानी जो की मैंने किसी को भेजी और कुछ दिन बाद वही कहानी मुझे वापस किसी और  के द्वारा मिली इसे ही कहते है सन्देश का प्रवाह और हमारी अज्ञानता| कोई धर्म या महाभारत पढ़ा होता तो वो तुरंत ही मेरी इस झूटी कहानी तो न मानता बल्कि बकवास करार देता या फिर मुझसे पूछता की आप किन तथ्यों के आधार पर कर्क्भुज का विवरण दे रहे है परन्तु ऐसा हुआ नहीं |

इस लेख के साथ मैं माफ़ी भी मांगूंगा की मैंने कर्क्भुज और कुछ अनजाने तथ्यों को बनाकर इस तरह से प्रस्तुत किया परन्तु आज के दौर का एक सत्य ये भी  है, बात थोड़ी चुभ सकती है पर  लोग सन्देश को प्रेषित करते समय बिलकुल गैरजिम्मेदार व्यवहार करते है जिससे देश में एक अलग तरह की आग लग गयी है जो  केवल समाज को आर्थिक और व्यवहारिक तौर पर कमजोर ही कर रहा है और

बूरी शक्तियां और बाहरी देश ये देख रहे है की इस भारत देश में एक सन्देश के माध्यम  से देश की  अर्थव्यवस्था और सामजिक शान्ति को आराम से  नुक्सान पहूँचाया  जा सकता है क्युकी ये देश अंगूरी लता संप्रेषण का पालन कर रहा है |

आखिर में बस इतना, की सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म  का इस्तेमाल जरुर करे पर देश में एक नागरिक होने के नियमो का पालन भी अवस्य करे अपनी जिम्मेदारी समझे और सुझबुझ से काम ले |

यतीन्द्र मंजू पाण्डेय



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